ढाकाः बांग्लादेश में 12 फरवरी यानी बृहस्पतिवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने नया इतिहास रच दिया है। 300 संसदीय सीटों वाले सदन में बीएनपी ने 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। इससे बीएनपी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान का बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री बनना तय हो गया है। बांग्लादेश के इतिहास में 36 साल बाद यह पहला अवसर आया है, जब कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। बता दें कि इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को प्रतिबंधों के चलते बाहर रखा गया था। लिहाजा मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच था।
बीएनपी लगातार निर्णायक जीत की ओर बढ़ रही है। मतगणना अभी भी जारी है। बता दें कि अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी अवामी लीग पार्टी के शासन का आंदोलन के बाद पतन हो गया था। इसके बाद बांग्लादेश में पहला आम चुनाव हो रहा है, जिसमें आवामी लीग को भाग नहीं लेने दिया गया। यूनुस सरकार ने आवामी लीग पार्टी को अवैध घोषित करके पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया और उसे चुनावों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया। इसके बाद मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच हुआ, जिसमें बीएनपी 200 से अधिक सीटों पर जीत की ओर आगे बढ़ रही है। बांग्लादेश चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि कई सीटों के नतीजे अभी प्रक्रिया में हैं और कुछ घंटों में घोषित हो सकते हैं। य
बांग्लादेश की सबसे कट्टर इस्लामवादी पार्टी और पाकिस्तान की आईएसआई और लश्कर व जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से संबंध रखने वाली जमात-ए-इस्लामी गठबंधन की इस चुनाव में भारी हार हुई है। यह गठबंधन महज 50 सीटों के आसपास सिमटता नजर आ रहा है। फाइनल नतीजों का अभी इंतजार है। इस चुनाव में अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को बहुत कम सफलता मिली। बीएनपी की बंपर जीत के सबसे बड़े चेहरे इस पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान हैं।
बीएनपी की बड़ी जीत के बाद अब तारिक रहमान का देश का अगला प्रधानमंत्री बनना तय हो गया है। वह 36 साल बाद बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनेंगे, क्योंकि 1990 के दशक से ही देश में महिलाएं (खालिदा जिया और शेख हसीना) ही प्रधानमंत्री पद संभालती आई हैं। अब तारिक रहमान और उनकी पार्टी की जीत को 'क्लीन पॉलिटिक्स' और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा माना जा रहा है। उन्होंने चुनाव से पहले भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और लोकतंत्र की बहाली का वादा किया था। साथ ही कानून-व्यवस्था में सुधार लाने का ऐलान भी किया था। ताकि देश का हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे।
तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था। इन दोनों ही सीटों पर उन्होंने भारी अंतर से जीत हासिल की है। बांग्लादेश में जेन-Z के आंदोलन के बाद हुआ यह पहला ऐतिहासिक चुनाव है, जिसमें 60% से अधिक वोटिंग हुई। इस चुनाव में बीएनपी की यह जीत राजनीतिक स्थिरता लाने और आर्थिक सुधारों की उम्मीद जगाती है, लेकिन जमात जैसे इस्लामी दलों की भूमिका और संवैधानिक बदलावों पर नजर रहेगी। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की हाल ही में गंभीर बीमारी के चलते मौत हो जाने पर पार्टी की पूरी कमान उनके बेटे तारिक रहमान के हाथों आ गई थी। फिर 17 साल के निर्वासन के बाद वह 2025 में देश लौटे थे।
बांग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया और शेख हसीना ने लंबे समय तक प्रमुख भूमिका निभाई है। दोनों महिलाओं ने ही 1991 के बाद से अधिकांश समय प्रधानमंत्री पद संभाला, जिसे "बैटलिंग बेगम्स" की प्रतिद्वंद्विता कहा जाता है। बीएनपी की नेता खालिदा जिया का पहला कार्यकाल 20 मार्च 1991 से 30 मार्च 1996 तक रहा। वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद उनका दूसरा कार्यकाल में 1996 कुछ हफ्ते ही रहा। इस दौरान उन्होंने एक विवादास्पद चुनाव के बाद इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1996 से 2000 तक शेख हसीना पहली बार प्रधानमंत्री रहीं। तीसरा बार खालिदा जिया फिर प्रधानमंत्री बनीं और उनका कार्यकाल 10 अक्टूबर 2001 से 29 अक्टूबर 2006 तक रहा।
जून 1996 में बांग्लादेश में नए आम चुनाव हुए, जिसमें शेख हसीना की अवामी लीग ने बहुमत हासिल किया। 23 जून 1996 को शेख हसीना ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और उनका कार्यकाल 15 जुलाई 2001 तक चला। इस दौरान उन्होंने आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन और क्षेत्रीय शांति (जैसे भारत के साथ गंगा जल समझौता) पर फोकस किया। हालांकि राजनीतिक अस्थिरता (विरोध प्रदर्शन, हड़तालें) बनी रही। साल 2001 में फिर खालिदा जिया सत्ता में आ गईं। इसके बाद शेख हसीना का दूसरा कार्यकाल 6 जनवरी 2009 से 5 अगस्त 2024 तक लगभग 15.5 वर्ष तक रहा। इस दौरान उन्होंने लगातार चार कार्यकाल में प्रधानमंत्री रहीं।
हालांकि छात्रों के आंदोलन के चलते वह अपना चौथा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं और उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया। इस प्रकार 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की सत्ता में लगातार महिलाओं का राज रहा। इसके बाद 18 महीने तक यूनुस की कार्यवाहक सरकार सत्ता में रही। अब 36 साल बाद बांग्लादेश को पहला पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा।
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